Childhood Vs Adulthood

Childhood And Adulthood.

Childhood Vs Adulthood


NOTE: कृपया इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें!


क्यों Youth अपने लक्ष्य पर focus नहीं कर पाते ?

1. Dreams.

बचपन में जो सपने होते थे वह छोटे से और सुनहरे होते थे आप अंदाज़ कर सकते हैं कि एक छोटा बच्चा जैसे कि आप में और हम सब क्या ?? देखते थे ज्यादातर सपने जो अपने दिमाग में कल्पना  किए होते हैं वह पूरे हो जाते अगर कुछ सपने या ये कहें छोटी सी ख्वाइश पूरी ना भी हो तो दुख उदासी के जैसी कोई बात होती ही नहीं थी अगर बुरा लगता था तो वह कुछ समय के लिए यह सब अस्थायी होता था न्यूनतम समय के लिए.

लेकिन अगर यही यंग की बात करें तो समय और उम्र के साथ इंसान की समझ में सोचने की शक्ति में और उसको वास्तविकता में परफॉर्म करने की चाह रखते हुए आगे भी बढ़ना चाहते हैं लेकिन उसी समय और सूझबूझ से यह भी याद रखना चाहिए कोई समस्या हमेशा नहीं रहती समय के साथ साथ यह समस्याएं भी बदलती रहती है ! और ठीक उसी तरह सपनों के लिए नए रास्ते मंजिल तक पहुंचाने का काम करते हैं तो सपने देखो कोशिश कभी मत छोड़ो,और उनको पूरा करो सक्षम बनो!

2Stress

बचपन की बात करूं तो बच्चे तो अपने में ही मस्त होते हैं ना कमाने की ना कुछ खोने की ना कुछ पाने का तनाव रहता है,बच्चे यह कहीं ना कहीं जानते हैं कि खेल में ही मजा हैै यही बात अहम भूमिका निभाती है बच्चों की जीवन में वे किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं , फिर वह बात गंभीर हो या साधारण.

या यूं कहें कि उनकी मन की स्थिति इतनी प्रगति नहीं हुई,कि किसी की वो किसी भी बात को गंभीरता से ले सके यह समझ उम्र के साथ-साथ बढ़ती है.

Adulthood.

लेकिन जवानी में समझ की जरूरत होती है किस बात को गंभीर लेना चाहिए ?और कौन सी बात वास्तविक में गंभीर है यह हर एक इंसान के लिए वैकल्पिक ही है, कि इंसान अपनी समझ का किस तरह से इस्तेमाल करता है ! जो भी जीवित वस्तुएं और इंसान इस धरती पर मौजूद हैं,

3. EQ/IQ

आई क्यू लेवल बचपन में कम होती है लेकिन जाने अनजाने में यह समझ जरूर जन्म लेती है कि अगर बच्चों को कहीं घूमने जाना हो और उनके मन में इच्छा हो कहीं घूमने की तो यह समय जानते हैं कि पापा नहीं तो मम्मी नहीं तो भैया नहीं तो बहन जरूर घुमाने कहीं ना कहीं लेकर जाएगी यह बात जानते हैं, और 80% ऐसा असल में होता भी है.

Adulthood.

लेकिन जवानी में बचपन की इस समझ को समझना बहुत ही जरूरी है कि कामयाबी का एक रास्ता बंद है, दूसरा रास्ता बंद है, तीसरा रास्ता बंद हो, तो चौथा रास्ता जरूर खुला होगा. तो प्रयास चारों के लिए बराबर करो भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रहो और प्रयास करते रहो .जब तक की काबिल ना हो जाओ.

4. Active

ज्यादातर एक्सपर्ट का मानना है कि बचपन में हम सब ज्यादा एक्टिव होते हैं बजाय एडल्ट एज में  हमारी ऊर्जा का कुछ % परसेंटेज घट जाता है लेकिन इसी सोच के सिर्फ मानने के चलते, बचपन में कंफर्ट जोन जैसा कुछ मौजूद ही नहीं रहता है  बिना किसी थकान के अपने खेल में मस्त रहते हैं..

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लेकिन जवानी में कंफर्ट जोन का मतलब पता होता है लेकिन पता होते हुए भी कंफर्ट जोन में जाने अनजाने में एंटर कर जाते हैं..और खुद को हारा और थका हुआ महसूस करते हैं. उस जाल में हम इस तरह से फंस जाते हैं कि चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते , समय से पहले कठोर संकल्प लेना पड़ेगा और इंसान को समय से पहले इस से बाहर आ जाना चाहिए.

5. Boundation

सीमा यह थोड़ा सा अजीब लगेगा कि बचपन में कुछ करने की चाह,सपने कुछ कर दिखाने का जज्बा और बहुत कुछ अच्छा करने के लिए कदम  उठाना चाहते है लेकिन बहुत  सी सीमा होती है क्योंकि बचपन में दुनिया को समझने की काम को सही ढंग से करने की समझ नहीं होती है इसी के चलते,

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लेकिन यही जवानी में सीमा बहुत ही कम होती है लेकिन फिर भी एक्शन (कार्य)नहीं ले पाते, 

कार्य को व्यक्त नहीं कर पाते और यह बिना सोचे समझे योजना बनाए गए कार्य में होता है और अज्ञात लत दिमाग को पकड़ करके रखती है और कार्य करे पाने में जागरूक नहीं हो पाते,यह प्रतिक्रिया दिमाग पर गलत प्रभाव डालती है और  जीवन में सही निर्णय लेने में कठिनाई होती है!

6. Fear

बचपन में Fear of Parents फिर भी ठीक होता था तकनीकी तौर पर ,कुछ भी काम गलत किया या कोई काम बिगाड़ दिया, क्योंकि पेरेंट्स यह जानते हैं कि हमारा बच्चा है और बच्चे को कैसे फिट रखना है उसकी कैसे देखरेख करनी है कैसे संभालना है यह अच्छी तरह पता होता है , उनसे दिमाग के स्तर की स्थिति पर कोई दिमागी बीमारी का खतरा भी नहीं होता है! जैसे चिंता,अवसाद,तनाव!

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Fear of People. हमें बचपन के इस डर को जरूर समझना चाहिएजिसका कोई उद्देश्य,महत्व या कोई मतलब नहीं है!उसके चलते  नये अवसर को खो देते मौका  खो देते हैं और बिना वजह नए विचार को जन्म देते हैं  जो कि 99% क्रिया रहित,व्यर्थ होते हैं,व्यर्थ विचार हमारे दिमाग की ही उपज है हमें इन विचार को और इस डर को समझने की ज्यादा जरूरत है,जब तक हम डर के पीछे की वजह को नहीं समझेंगे यह विचार क्यों? आ रहे हैं हम एक्शन लेने से डरते रहेंगे,हमें अवसरों को नहीं खोना चाहिए .यह वह बीज भी है जो पेड़ के बाद फल जरूर देगा!

Writer & Editor.. S. K. S

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