How to control your thoughts In Hindi how to control yourself

How to control your thoughts In Hindi |how to control yourself  The Journey Beyond Fear: Leverage the Three Pillars of Positivity to Build Your Success


How to control your thoughts
How to control your thoughts 

 विचार एक आभासी हलचल की तरह है जो हर एक इंसानी दिमाग में चलते रहते हैं, हम विचारों को 100% कंट्रोल नहीं कर सकते हैं लेकिन उनकी दिशा को बदल सकते हैं

 अगर दिमाग में नकारात्मक विचार आ रहे हैं तो सकारात्मक विचार की तरफ पहल कर सकते हैं और यह पहल सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बढ़ाएगी इसी के चलते नई और सकारात्मक विचारों का जन्म होगा. और 1 दिन में 6000 से भी ज्यादा हमारे दिमाग में विचार आते रहते हैं, यह हर एक अलग अलग इंसान पर निर्भर करता है कि उसके दिमाग में किस तरह के विचार आ रहे हैं पॉजिटिव या नेगेटिव

और कई हद तक विचारों से ही निर्णय लेने की क्षमता और दिशा निर्भर होती है, की विचार किस तरह की आ रहे हैं विचारों से इंसान दुखी महसूस कर रहा है या खुशी महसूस हो रही है या बेहद उत्तेजित है किसी काम को लेकर जो कि विचारों की शक्ल में एक छवि बन रही है, और यह भी अच्छी बात है कि कोई भी विचार स्थायी नहीं रहते  यह समय और परिस्थिति के हिसाब से बदलते रहते हैं जैसे अगर परिस्थिति सकारात्मक ऊर्जा को जन्म देने वाली है तो विचार सकारात्मक आएंगे और अगर परिस्थिति नकारात्मक उर्जा को जन्म देने वाली है तो नकारात्मक विचार ही आएंगे..

यही विचारों का रहस्य है ,

विचार क्यों आते हैं ??

 इंसान के दिमाग में विचारों का आना प्राकृतिक रूप से संभव है विचारों का आना जीवित वस्तु में ही संभव है विचारों के आने का कारण हमारा दिमाग है जो कि दो रूप में काम करता है चेतन और अवचेतन मन जो कि हमारे द्वारा की गई क्रियाओं को एक याद के रूप में इकट्ठा करके रखता है, और हम रोज जो भी काम करते हैं या कोई नई जगह को देखते हैं या कुछ नया या अद्भुत देखते हैं जो आज से पहले कभी नहीं देखा हो वह देखते सुनते हैं या महसूस करते हैं, और इसी से फिर विचारों का जन्म होता है और उसी से संबंधित विचार स्वाभाविक रूप से आने शुरू हो जाते हैं जैसे ही हमारे शरीर के सेंसस इसके संपर्क में आते ही, दिमाग को निर्देश देते हैं और विचारों का आना शुरू हो जाता है और एक बार जो विचार चेतन मन में जगह बना लेते हैं अगर वह विचार कई बार या  बार-बार हमारे दिमाग में आता है तो वह हमेशा के लिए स्थाई हो जाता है और अगर कभी जीवन में वही दृश्य दोबारा से सामने आता है तो उसे संबंधित जो भी जानकारी चेतन मन में इकट्ठी होती है वही विचारों का आना कहीं हद तक शुरू हो जाता है और कुछ नए विचारों का भी आना शुरू हो जाता है

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